Wednesday, September 2, 2009

तेरी खु़शबू की इक गली

कुछ मेरे ख़याल का आवारापन,
कुछ तेरी याद मनचली तो थी

कुछ तो आँखों मे दर्द था गहरा,
कुछ लबों पर हँसी खिली तो थी

मैं फ़रेब-ए-निगाह समझा था,
राह मे एक खुशी मिली तो थी

फ़लक से टूटा वो तारा न मिला,
रात आँखों मे ही ढली तो थी

ख्वाहिशों के बुझे चिरागों में,
रूह शब भर मेरी जली तो थी

मेरी साँसों के शहर मे जि़न्दा,
तेरी खु़शबू की इक गली तो थी

तेरी आँखों को नदी होना था,
प्यास लब पर मेरे पली तो थी

थक गया कारवाँ साँसों का,
मंजिल की झलक मिली तो थी.

26 comments:

  1. तेरी खु़शबू की इक गली

    I liked it...

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  2. बहुत ही खूबसूरत ग़ज़ल...

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  3. बहुत आत्मविश्वास से कही गयी एक बेहतरीन ग़ज़ल

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  4. कुछ तो आँखों मे दर्द था गहरा,
    कुछ लबों पर हँसी खिली तो थी
    बेहतरीन ग़ज़ल

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  5. अपूर्वजी,
    आपकी टिप्पणी पढ़कर यहाँ आ गया . 'मुक्ताकाश' में परवाज़ की इच्छा व्यक्त करने का शुक्रिया...
    'मैं अपने मेज़ की दराज़
    खोलते डरता हूँ...
    मेरी ही शक्ल का
    एक ख्वाब
    वहां सोया है...
    जाने क्यों
    अपना हमशक्ल देखते हुए
    घबराता है मेरा वजूद !'
    छोटी बहर की यह प्यारी-सी ग़ज़ल प्रीतिकर लगी,. बधाई !

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  6. अपूर्व जी !!
    गूँज अनुगूँज पर आने और टिप्पणी देने के लिए धन्यवाद !

    आपकी यह गजल दिल को छू गई :

    ख्वाहिशों के बुझे चिरागों में,
    रूह शब भर मेरी जली तो थी

    मेरी साँसों के शहर मे जि़न्दा,
    तेरी खु़शबू की इक गली तो थी

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  7. मैं फ़रेब-ए-निगाह समझा था,
    राह मे एक खुशी मिली तो थी

    फ़लक से टूटा वो तारा न मिला,
    रात आँखों मे ही ढली तो थी
    waah lajawab

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  8. मेरी प्रतिक्रिया..तेरे आंगन में आ गई...
    तेरी इस पोस्ट सही नहीं थी कोई,
    वैसे मुझे पोस्टें मिली तो थी।

    पर खूब न थी तेरे शब्दों सी
    एक काव्यकली खिली तो थी॥

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  9. अपूर्व जी आपकी कविता में न प्राप्त करने का दर्द है
    थक गया कारवां साँसों का
    मंजिल की झलक मिली तो थी ,
    बहुत सुन्दर पंक्तियाँ हैं |

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  10. khubsoort...sahee shabdo ka prayog

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  11. kuchh mere khyaal kaa avarapan
    kuchh teri yaad to manchali to thi..
    bahut khoobsoorti se rachi gai gazal he/ pahli baar aayaa aour aakar mazaa aagayaaji.
    "DAFATAN" par mujhe ek she'r yaad aa rahaa he..masha allah..bahut dino baad is shbd ko suna yaani aapke blog par padhha
    " DAFATAN TARKE TAALLUK BHI EK RUSAVAAI HE
    ULAJHE DAAMAN KO SULJHATE NAHEE YU JHATAKAA DEKAR"
    Apoorv..aapki shayari behtreen he..aataa rahunga ji, abhi to aapko bahut padhhna he.

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  12. behtarin abhivyakti.Achchhi lagi aapki ye gazal.
    Navnit Nirav

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  13. aapki prerna hetu dhanyavaad, main bahut hi yogbhrasht hoon bhai....

    ...tabhi likha hai may be to be continued. par dekho....

    "मेरी साँसों के शहर मे जि़न्दा,
    तेरी खु़शबू की इक गली तो थी"

    badhiya as'aar....

    "न होता मैं तो क्या होता"

    ...ek genuine kadrdan kum ho jaataa....

    :)

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  14. मेरी साँसों के शहर मे जि़न्दा,
    तेरी खु़शबू की इक गली तो थी

    ये शेर बहुत अच्छा लगा ....ओर तुम्हारे ब्लॉग का नाम बहुत खूबसूरत है

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  15. बहुत सुन्दरता पूर्ण ढंग से भावनाओं का सजीव चित्रण... सचमुच में बहुत ही प्रभावशाली लेखन है... वाह…!!! वाकई आपने बहुत अच्छा लिखा है। आशा है आपकी कलम इसी तरह चलती रहेगी, बधाई स्वीकारें।

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  16. आप के द्वारा दी गई प्रतिक्रियाएं मेरा मार्गदर्शन एवं प्रोत्साहन करती हैं। आप मेरे ब्लॉग पर आये और एक उत्साहवर्धक प्रतिक्रिया दिया…. शुक्रिया.
    आशा है आप इसी तरह सदैव स्नेह बनाएं रखेगें….

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  17. "Waah"! har rachna ke liye..aur koyi lafz nahee soojh raha!

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  18. अपूर्वजी,
    शायद, आखिरी "आज अपना ही जनाजा मुझे ले जाने दो"में
    जनाजा मुझे ले जाने दो,का प्रयोग दोहराव हो सकता हॆ,कभी कभी लिखते वक्त ऎसा हो जाता हॆ, जहा आप को दोहराव महसूस हुआ हो,उसे बतला दे,तो उसमें बदलाव कर देता,
    मेरी पोस्ट मे टिप्पणी, व सुझाव के लिये धन्यवाद

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  19. अपूर्वजी,
    आखिरी शेर मे बदलाव किया हॆ,कृपया अपनी राय देने का कष्ट करेगे.

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  20. तेरी आँखों को नदी होना था,
    प्यास लब पर मेरे पली तो थी...nadi or pyaas ka janamo ka naataa....apka blog bahut achha hai....amazing...i hv no words aap bahut achha likhte hai...

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  21. बहूत अच्छी रचना. कृपया मेरे ब्लॉग पर पधारे.

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  22. अच्छा लगा आकर...दर्पण के ब्लौग पर तुम्हारी टिप्पणियों ने ध्यान आकर्षित किया। बहुत अच्छा लिखते हो....

    तुम्हारे लिखे का इंतजार रहेगा अब से...!

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  23. मेरी साँसों के शहर मे जि़न्दा,
    तेरी खु़शबू की इक गली तो थी..
    Bahut achcha likha hai aapne. Aise hi likhte rahe. thanks

    ReplyDelete
  24. अच्छा लगा आकर...दर्पण के ब्लौग पर तुम्हारी टिप्पणियों ने ध्यान आकर्षित किया। बहुत अच्छा लिखते हो....

    तुम्हारे लिखे का इंतजार रहेगा अब से...!


    Kitni tankhwa milegi? PR Advisier ko???

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  25. Jai Gogadev, long time no new post ?

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